आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले में ये कहने की हिम्मत नहीं जुटा सका की बाबर ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी??

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अयोध्या के फैसले में भी सुप्रीम कोर्ट ने मुसलमानों के साथ पक्षपात करते हुए उनको अयोध्या के अंदर ही 5 एकड जमीन मस्जिद बनाने के लिए दे दी!?

आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले में ये कहने की हिम्मत नहीं जुटा सका की बाबर ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी।


जबकि पूरी दुनिया में लाखों करोड़ों टूटी हुई मूर्तियां मंदिर और गिरिजाघर जिहाद की मॉडस ऑपरेंडी की गवाही देते हुए आज भी खड़े हैं। 


सुप्रीम कोर्ट हर मुद्दे पर संज्ञान ले या फिर स्वत संज्ञान लेने की पक्षपात पूर्ण परंपरा बंद करे। जेहादियों की याचिकाओं पर बिना रोटी दौड़े दौड़े फैसले के लिये बेकरार रहना, सभ्य इंसानों की आदत नहीं है!?


नूपुर शर्मा के केस में भी *नूपुर के खिलाफ देश भर में दायर सारे मामलों को दिल्ली की अदालत में लाए जाने के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा के खिलाफ कई ऑब्जर्वेशन दिए।


और *तब तालिबान ने भी सुप्रीम कोर्ट की प्रशंसा की थी। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने तब कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का ये बयान कि नूपुर को माफी मांगनी चाहिए एकदम सही है।


क्या *लाखों रूपया खर्च करके जमीन खरीदकर घर बनवाने से अच्छा, सस्ता और किफायती रास्ता देश का माननीय उच्चतम न्यायालय दिखा रहा है!?


क्या ये जेहादियों को ये बताना चाहते है की आपको करना क्या है... 500 लोगों को इकट्ठा कीजिए, रेलवे या किसी सरकारी जमीन पर सामुदायिक कब्जा कीजिए, किसी तरह उस जमीन पर अपना कच्चा पक्का मकान बनवा लीजिए।


आपको पता है कि ये काम अवैध है, लेकिन आपके इस अवैध काम को मानवीय पहलू पर संरक्षण देने का काम सुप्रीम कोर्ट करेगा, और सरकार/प्रशासन को निर्देश देगा की कब्जा खाली कराने से पहले आपका कहीं दूसरी जगह पुनर्वास किया जाए।


इस तरह से आपका *दो नंबर का अवैध कब्जा एक नंबर में कन्वर्ट हो जायेगा। मुफ्त में आपको जमीन/घर/मुआवजा सब मिल जायेगा, जैसे बाबरी के मामले में मिला!?


क्या भारत देश के न्यायिक सिस्टम की आरती उतारनी चाहिए या फिर इनको आइना दिखाने का समय आ गया है? 


सुप्रीम कोर्ट को सुप्रीम दलालों का कोठा बनाने वाली न्यायपालिका के श्रेष्ठ दलालों को बर्खास्त किया जाए, और कोलेजियम को खत्म किया जाए ताकि योग्यता को वरीयता ही, परिवारवादी मानसिकता के दलालों को नहीं!*


राजनीति की ही तरह न्यायपालिका में भी परिवारवाद का मवाद, सड़ांध मार रहा है, बिकाऊ मीडिया के मुंह पर ताला है, सरकार चुप बैठी है, नेता अभिनेता सब मलाई खाने में लगे हुए हैं, आम आदमी मुफ्तखोरी कर रहा है, कौन उठाएगा इसके खिलाफ आवाज!?


भारतीय जनता को मिलकर, हिंदूविरोधी मानसिकता के दलालों का पुरजोर विरोध और बहिष्कार करना होगा!


कानून के खिलाफ चलाई जा रही मजहबी मानसिकता के जिल्लत ए इलाही की नाजायज औलादों की, जूता परेड जरूरी है.. भारत की केंद्र सरकार को स्वच्छ भारत निर्माण हेतु, राजनीति के बाद अब न्यायपालिका को स्वच्छ करने की आवश्यकता है!?


एक देश, दो विधान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान, हिंदूविरोधी मानसिकता के थूकलीगी, धर्मांतरण माफिया, चादर फादर गैंग का पूर्ण बहिष्कार करेगा भारत, और अवश्यकता पड़ने पर श्रीलंका की तरह ऐसे परिवारवादियों के बैंड भी बजाएगा, अभी भी वक्त है सुधर जाओ, इसके सिवाय कोई विकल्प नहीं, पाकिस्तानी गंदगी भारत में नहीं चलेगी, कहीं लिख लो!?


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