भूमि पूजन कभी का हो चुका और अब मंदिर भी बनने लगा है, पूरा होने के करीब ही है ,
लेकिन फिर क्या-?
यही एक बहुत बड़ा सवाल है-?
बाबर द्वारा मंदिर को नष्ट करने के बाद, कई बडे बडे सूरमा राजा और महाराजा आये और गये, लेकिन मंदिर का योग अब आया है-
राम के मंदिर को किसने तोड़ा था- ?
अफगानिस्तान से आये बाबर ने ..
पर बाबरी मस्जिद का केस किसने लड़ा-?
कांग्रेसियों- व कम्युनिस्टों ने- जिनके नाम क्षैत्र व प्रान्तशः भारत में अलग अलग भी हैं -
तो यह ऐसा क्यों हुवा -??????
कहां है रावण की ताकत और कहां है बंदरों की ताकत-? कहां है कांग्रेस की ताकत और कहां है मोदी की ताकत-?
अब यहां सवाल केवल मंदिर बनाने का नहीं बचा बल्कि अब मंदिर के संरक्षण का है...
जब बाबर आया तब भी हम बहुमत में थे, फिर भी मंदिर टूट गया था-
गजनी के आने पर भी हम बहुमत में ही थे ,फिर भी सोमनाथ के मंदिर को तोड़ दिया गया था-
जब अलाउद्दीन आया तब भी हम बहुमत में थे, फिर भी रानी पद्मिनी को जौहर करना पड़ा था-
जब मोहमंद गोरी आया तब भी हम बहुमत में थे, फिर भी पृथ्वीराज चौहान की आंखें फटी की फटी रह गयीं थी-
जब अकबर था तब भी हम बहुमत में थे,फिर भी राणा को अकेले ही लडना पडा और वह महान प्रतापी प्रताप हार गये..
जब औरंगजेब था तब भी हम बहुमत में थे,फिर भी अकेले शिवाजी महाराज को युद्ध करना पड़ा था...
जब अब्दाली आया तब भी हम बहुमत में थे, फिर भी पानीपत में हार मिली थी -
जब अंग्रेज आये तब भी तो हम बहुमत में थे,फिर भी, झांसी की रानी और तात्या टोपे की इन्हीं कारणों से ही हार हुयी थी-
जब कांग्रेस थी तब भी हम बहुमत में थे,परन्तु फिर भी राम मंदिर 40 साल तक बंद रहा-
तो अब सवाल मंदिर बनाने का नहीं, वह बनेगा व बन रहा है,सवाल है बनाये रखने का है-
उस समय बाबर अफगानिस्तान से आया था, लेकिन अब तो हमारे बीच सैकड़ों बाबर रहते हैं-
उस समय अंग्रेज लंदन से आये थे, लेकिन अब हमारे बीच सैकड़ों अंग्रेज रह रहे हैं-
उस समय केवल अंग्रेज हमारे दुश्मन थे-अब "है राम" बोलकर सत्ता झपटने वाले हमारे सारे राम विरोधी राजनीतिज्ञ इसमें शामिल हो गये हैं-
सवाल खुद व्यवस्थित हो रहा है- सवाल यही है कि हम अपने धर्म/आस्था के लिये क्या करते हैं-?
आज मोदी हैं तो हम बेफिक्र हैं- लेकिन फिर क्या-?
मोदी रोज़ तो आने वाले नही हैं,धर्म के प्रति क्या हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है- ??
जब राम मंदिर बन जाता है तो वह सूर्य और चंद्रमा की तरह बना रहे- इसलिये संगठित रहना तो हमें ही सीखना होगा-
किसी ने कहा तो है -
जो लोग अतीत को भूल जाते हैं -वह इतिहास दोहराते रहते हैं, इसलिये मैंने केवल आपको अतीत याद दिलाने की कोशिश भर की है-
क्योंकि मैने व आपने देखा है कि विवाद होने पर वह आप पर तुरन्त हमला करते हैं क्योंकि वह जानते हैं आप अकेले है, आपका साथ कोई देने नहीं आता -
और आप उनपर हमला नहीं कर पाते क्योंकि आप जानते है वह एक के पीछे सारे खडे हो जाते हैं -
समस्या यह है -
यह समस्या तब राजाओं में थी- आज प्रजा में है -
मरने व पिटने वाले को ना बचाकर उसका शानदार वीडियो बनाने वालों में है -
तय कर लीजिये कह दीजिये -मोदी को, भाई हमारे हाथ में मेंहदी लगी है , रूकवा दे मन्दिर निर्माण को -
और नहीं तो - फिर समस्याओ पर स्यापा नहीं , समाधान की तरफ बढिये ,इतिहास से सबक लेकर ...
अग्निवीर बनिये-
जय राम जी की🙏🙏🙏

Peace if possible, truth at all costs.